क्या आपने कभी सोचा है कि एक नया जीवन शुरू करने के लिए शरीर के भीतर क्या प्रक्रिया चलती है? इस अद्भुत यात्रा की शुरुआत होती है एक बेहद छोटी कोशिका से, जिसे हम शुक्राणु (sperm meaning in hindi) या स्पर्म कहते हैं। जिस तरह महिलाओं के प्रजनन तंत्र में अंडाणु (Egg) ज़रूरी हैं, ठीक उसी तरह पुरुष प्रजनन प्रणाली में sperm सबसे महत्वपूर्ण है।
Dr. Sankalp Singh (MBBS, MS, MRCOG (London), FRM, DRM (Germany), जो की Yaami IVF and Fertility Center में Reproductive Medicine & IVF Specialist हैं , उनका कहना है की स्पर्म असल में पुरुष की प्रजनन कोशिका (male reproductive cell) है। जैसे महिला के शरीर में अंडाणु बनते हैं, वैसे ही पुरुष की प्रजनन प्रणाली में स्पर्म तैयार होते हैं, और यही आगे जाकर जीवन की नींव रखते हैं। सीधे शब्दों में कहें, शुक्राणु ( sperm) ही वह वाहक है जो पुरुष के आनुवंशिक गुण (genetic material/DNA) को अगली पीढ़ी तक पहुँचाता है।
अगर आपके मन में भी सवाल हैं कि स्पर्म होता क्या है(sperm in hindi meaning), इसका उत्पादन कैसे होता है, या फिर इससे जुड़ी समस्याएं और उनके इलाज क्या हैं, तो यह ब्लॉग आपके सभी doubts clear कर देगा।
आइए आपकी जानकारी के लिए इस विषय को आसान भाषा में समझते हैं।
स्पर्म का हिंदी में अर्थ (Sperm Meaning in Hindi)
स्पर्म (sperm in hindi meaning) को हिंदी में शुक्राणु कहा जाता है। यह पुरुष के शरीर की सबसे ज़रूरी प्रजनन कोशिका (reproductive cell) है। इसका मुख्य काम मादा के अंडाणु (egg cell) से मिलकर एक नए जीवन की नींव रखना है।
शुक्राणु (Sperm) एक गाढ़े तरल पदार्थ में मौजूद होते हैं, जिसे वीर्य (semen) कहते हैं। यह वीर्य ही स्खलन (ejaculation) के समय बाहर निकलता है। वीर्य आपके शुक्राणुओं को पोषण और ऊर्जा देता है, साथ ही यह उन्हें मादा के प्रजनन मार्ग (reproductive tract) में तैरने में भी मदद करता है, ताकि वे सीधे अंडाणु तक पहुँचकर उसे निषेचित (fertilization) कर सकें।
शुक्राणु ही वह माध्यम है जिससे आपके डीएनए (DNA) और आनुवंशिक गुण अगली पीढ़ी तक पहुँचते हैं। इसलिए, यदि आप माता-पिता बनने की योजना बना रहे हैं, तो अपने स्पर्म की गुणवत्ता, संख्या और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है ताकि गर्भधारण की प्रक्रिया सहज और सफल हो सके।
स्पर्म का कार्य (Function of Sperm)

शुक्राणु का सबसे महत्वपूर्ण और एकमात्र काम निषेचन (Fertilization) करना है। इसका मतलब है कि शुक्राणु (sperm) को female के अंडाणु (egg cell) तक पहुँचकर उससे मिलना होता है (sperm meaning in hindi)। जब यह सफलतापूर्वक अंडाणु को निषेचित (fertilize) कर देता है, तो इस प्रक्रिया से युग्मनज (Zygote) बनता है।
यही युग्मनज (Zygote) आगे चलकर भ्रूण ( embryo) बनता है और बच्चे के रूप में विकसित होता है। स्पर्म अपने सिर (head part) में डीएनए (DNA) लेकर जाता है, जो बच्चे की कद-काठी, रंग-रूप और अन्य आनुवंशिक गुणों को निर्धारित करता है।
शुक्राणु का उत्पादन कैसे होता है? (How is sperm produced?)
शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) कहा जाता है। यह कोई तुरंत होने वाली प्रक्रिया नहीं है और आपके अंडकोष (Testicles) में लगातार चलती रहती है।
- यह प्रक्रिया पुरुषों में किशोरावस्था (Puberty) से शुरू होती है और जीवनभर चलती रहती है।
- शुक्राणु उत्पादन में टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) जैसे पुरुष हार्मोन बहुत अहम भूमिका निभाते हैं।
- एक शुक्राणु को पूरी तरह तैयार होने और mature होने में लगभग 72 दिन का समय लगता है।
- उत्पादन के बाद, शुक्राणु एपिडीडिमिस (Epididymis) नामक संरचना में जमा होते हैं।
- इसी जगह पर शुक्राणु पूरी तरह से परिपक्व (mature) होते हैं और अंडाणु (egg cell) तक पहुँचने के लिए तैरने की क्षमता हासिल करते हैं।
स्पर्म की संरचना (Structure of Sperm)

शुक्राणु कोशिका बेहद छोटी पर जटिल होती है, जिसे आप मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बाँट सकते हैं:
सिर (Head) – डीएनए या आनुवंशिक सामग्री
- यह शुक्राणु का सबसे ज़रूरी भाग है।
- इसमें आपका डीएनए (DNA) यानी आनुवंशिक सामग्री होती है।
- निषेचन (fertilization) के समय यही हिस्सा अंडाणु के अंदर प्रवेश करता है।
- सिर के ऊपरी हिस्से पर एक टोपीनुमा संरचना होती है, जिसे एक्रोसोम (Acrosome) कहते हैं।
- एक्रोसोम में विशेष एंजाइम होते हैं जो अंडाणु की बाहरी कठोर परत को भेदने में मदद करते हैं।
मध्य भाग (Midpiece) – ऊर्जा का स्रोत
- यह सिर और पूंछ को जोड़ता है और इसे शुक्राणु का powerhouse माना जाता है।
- इसमें बड़ी संख्या में माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) होते हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया ही शुक्राणु को तैरने के लिए ज़रूरी ऊर्जा (Energy) प्रदान करते हैं।
पूंछ (Tail) – स्पर्म की गति का कारण
- यह सबसे लंबा हिस्सा है, जिसे medical language में फ्लैगेला (Flagella) भी कहा जाता है।
- पूंछ एक चाबुक की तरह हिलती है, जिससे शुक्राणु को वीर्य में आगे बढ़ने की रफ़्तार (motility) मिलती है।
- इसी गतिशीलता के कारण शुक्राणु लंबी दूरी तय करके अंडाणु तक पहुँच पाता है।
स्पर्म से जुड़ी सामान्य समस्याएं (Common Sperm Problems)

अगर आपको और आपके पार्टनर को गर्भधारण (concieve) करने में परेशानी आ रही है, तो इसकी वजह शुक्राणु (sperm) से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याएं हो सकती हैं:
1. कम शुक्राणु संख्या (Low Sperm Count) (Oligospermia)
यदि आपके वीर्य के प्रति मिलीलीटर (per ml) में 15 मिलियन से कम शुक्राणु हैं, तो इसे कम संख्या माना जाता है। इससे अंडाणु तक पहुँचने वाले शुक्राणुओं की संख्या घट जाती है।
2. कमजोर गति (Low Motility) (Asthenozoospermia)
इसका अर्थ है कि आपके शुक्राणु (Sperm) पर्याप्त तेजी से या सही दिशा में तैर नहीं पा रहे हैं। गति की कमी के कारण वे अंडाणु तक समय पर नहीं पहुँच पाते हैं, जिससे निषेचन मुश्किल हो जाता है।
3. असामान्य आकार (Abnormal Morphology) (Teratozoospermia)
अगर शुक्राणु का सिर, मध्य भाग या पूँछ सामान्य आकार का नहीं है, तो उनके काम करने या अंडाणु (egg cell) को निषेचित (fertilize) करने की क्षमता पर असर पड़ता है।
4. वीर्य में शुक्राणु न होना (Azoospermia)
यह ऐसी स्थिति है जहाँ स्खलन (ejaculation) के समय निकलने वाले वीर्य में बिल्कुल भी शुक्राणु (sperm) मौजूद नहीं होते हैं।
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शुक्राणु की कमी के उपचार (Sperm Deficiency Treatments)
शुक्राणु की गुणवत्ता या संख्या में कमी होने पर कई उपचार उपलब्ध हैं। साधारणतः आपका इलाज समस्या की जड़ और उसकी गंभीरता पर निर्भर करेगा। आइये जानते हैं की वो कौन कौनसे steps हैं जो आपकी शुक्राणु की कमी का उपचार करने तथा conceive करने में सहायक होते हैं।
- जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle changes): सबसे पहले, धूम्रपान-शराब छोड़ना, पौष्टिक आहार लेना, और तनाव को कम करना आपकी sperm quality को बेहतर बनाने में मदद करता है।
- हार्मोनल थेरेपी (Hormonal Imbalance): यदि शुक्राणु की कमी हार्मोनल असंतुलन के कारण है, तो डॉक्टर दवाएं या इंजेक्शन दे सकते हैं।
- दवाएँ (Medicines): कुछ विशेष दवाएँ हैं जो शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता (Quality) को सुधारने में सहायक होती हैं।
- वीर्य पुनर्प्राप्ति (Sperm Retrieval): एजोस्पर्मिया (Azoospermia) के मामलों में, शुक्राणु को सर्जरी के द्वारा सीधे अंडकोष से निकाला जाता है।
- IUI (इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन): इसमें सबसे बेहतर शुक्राणुओं को छाँटकर सीधे महिला के गर्भाशय (Uterus) में डाला जाता है।
- IVF या ICSI: गंभीर मामलों में, IVF या ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) जैसी advance technique का उपयोग किया जाता है, जहाँ शुक्राणु को सीधे अंडाणु के अंदर इंजेक्ट किया जाता है।
Sperm Motility meaning in Hindi
Sperm Motility(Sperm Motility meaning in Hindi) का मतलब है शुक्राणु गतिशीलता या शुक्राणु की चाल। आसान शब्दों में कहें तो, यह वह क्षमता है जिससे शुक्राणु तेज़ी और सीधाई के साथ आगे बढ़ते हुए अंडाणु तक पहुँचते हैं। सफलतापूर्वक गर्भधारण (concieve) करने के लिए शुक्राणु की चाल (motility) का सही होना बहुत ज़रूरी है।
निष्कर्ष (Conclusion)
शुक्राणु केवल एक कोशिका नहीं हैं, ये एक नए जीवन के वाहक हैं। इनकी संख्या, गति और सही आकार, ये तीनों ही मिलकर गर्भधारण (conceive) करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Dr. Sankalp Singh (MBBS, MS, MRCOG (London), FRM, DRM (Germany), Reproductive Medicine & IVF Specialist at Yaami IVF and Fertility Center, के अनुसार आपको अपने पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। आपकी रोजमर्रा की आदतें जैसे असंतुलित भोजन, कसरत न करना, और तनाव ग्रस्त लाइफस्टाइल सीधे-सीधे शुक्राणु की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है।
शुक्राणु की कमी या उनकी धीमी चाल जैसी समस्याओं का इलाज अब मुमकिन है। अगर आपको या आपके पार्टनर को गर्भधारण (conceive) करने में दिक्कत आ रही है, तो यामी आईवीएफ एंड फर्टिलिटी सेण्टर आपके लिए भरोसेमंद विकल्प हो सकता है। हमारी टीम आपके माता-पिता बनने के सपने को साकार करने में पूरी तरह सहायता करेगी।
FAQ:
स्पर्म क्या होता है?
स्पर्म (sperm) पुरुष की प्रजनन कोशिका है, जो अंडाणु (egg cell) को फर्टिलाइज़ करती है।
स्पर्म को हिंदी में क्या कहते हैं?(sperm meaning in hindi)
स्पर्म(Sperm) को में शुक्राणु कहते हैं।
स्पर्म का क्या काम होता है?
स्पर्म का सबसे महत्वपूर्ण और एकमात्र काम निषेचन (Fertilization) करना है।
स्पर्म की संख्या कम क्यों हो जाती है?
अगर आपको तनाव है, धूम्रपान करते हो, शराब का सेवन करते हो, शरीर में गर्मी की समस्या है, पोषण की कमी या हार्मोनल इम्बैलेंस है तो स्पर्म की संख्या काम हो सकती है।
क्या स्पर्म की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है?
अगर आप अच्छा आहार लें, रोज़ व्यायाम करें, तनाव को नियंत्रण में रखें और डॉक्टर की सलाह लें तो स्पर्म की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।
सामान्य स्पर्म काउंट कितना होता है?
सामान्य स्पर्म काउंट प्रति मिलीलीटर वीर्य में 15 मिलियन (1.5 करोड़) या उससे अधिक होना चाहिए।

Dr. Sankalp Singh (MBBS, MS – Obstetrics & Gynecology, FIRM, FRM – Germany) is a highly respected Reproductive Medicine and IVF specialist with over 20 years of clinical experience. He is the founder and chief consultant at Yaami Fertility & IVF Center, Indore, where he provides advanced fertility solutions including IUI, IVF, ICSI, and fertility preservation. Trained internationally, Dr. Singh combines global expertise with a compassionate approach to guide couples on their journey to parenthood. He is also deeply committed to academic teaching, clinical research, and spreading awareness about reproductive health and fertility treatments.










