गर्भाशय महिला प्रजनन तंत्र का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसे हिंदी में गर्भाशय (uterus in hindi) कहा जाता है। यह वह स्थान होता है जहां निषेचित अंडाणु विकसित होकर शिशु का रूप लेता है। इसका सामान्य आकार नाशपाती जैसा होता है और यह मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करने, हार्मोनल संतुलन बनाए रखने, गर्भधारण और प्रसव में मुख्य भूमिका निभाता है। गर्भाशय के आकार और स्वास्थ्य में बदलाव fibroids, infection, pregnancy, menopause या अन्य uterine disorders के कारण हो सकते हैं, जिससे दर्द, अनियमित periods या infertility जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्भाशय का स्वस्थ रहना महिला की reproductive health, fertility और overall wellbeing के लिए बेहद जरूरी होता है।
माँ बनने का सपना हर महिला के दिल में एक खास जगह रखता है और यह सफर शुरू होता है उनके शरीर के एक अद्भुत अंग से, जिसे गर्भाशय या uterus कहते हैं। यह वह स्थान है जहां एक नन्हा जीवन आकार लेता है, बढ़ता है, और नौ महीनों में एक पूर्ण शिशु बन जाता है। लेकिन कई बार, जब गर्भधारण में कोई दिक्कत आती है या डॉक्टर गर्भाशय के बारे में बात करते हैं, तो मन में सवाल आने लगते हैं।
आखिर यह गर्भाशय (uterus in hindi) क्या होता है?
Yaami IVF and Fertility Centre की विशेषज्ञ Dr. Swati Singh (Reproductive Medicine & IVF Specialist) MBBS, MD, DNB, FRM, DRM (Germany) कहती हैं कि गर्भाशय का अर्थ होता है ‘गर्भ का स्थान’। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह वह अंग है जहाँ गर्भ ठहरता है। गर्भाशय को समझना सिर्फ pregnancy के लिए ही नहीं, बल्कि हर महिला कि overall health के लिए भी बेहद जरूरी है।
आइये गर्भाशय (uterus in hindi) को इस blog में विस्तार से समझते हैं और साथ ही जानते हैं इसका सामान्य आकर क्या होता है, यह आपके स्वास्थ्य में कैसी भूमिका निभाता है, और इसकी देखभाल कैसे करें।
Uterus Meaning in Hindi – गर्भाशय का अर्थ

Uterus को हिंदी में गर्भाशय कहा जाता है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है, गर्भ यानी भ्रूण और आशय यानी घर। यह उल्टे नाशपाती के आकार का होता है और मूत्राशय (bladder) और मलाशय (rectum) के बीच में स्थित होता है।
सीधे शब्दों में कहें तो गर्भाशय वह स्थान है जहां नया जीवन पलता और बढ़ता है। मेडिकल भाषा में इसे Uterus या Womb कहा जाता है। आइये जानते हैं गर्भाशय के मुख्य कार्य:
- निषेचित अंडाणु (fertilized egg) को स्वीकार करना और उसे विकसित होने के लिए सुरक्षित वातावरण देना।
- गर्भावस्था के दौरान बढ़ते शिशु को पोषण और सुरक्षा प्रदान करना।
- प्रसव के समय संकुचन (contractions) करके शिशु को बाहर लाने में मदद करना।
- मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करना।
Uterus की सामान्य आकार (Normal Size of Uterus)
एक स्वस्थ, गैर-गर्भवती महिला के गर्भाशय का आकार लगभग एक नाशपाती (Pear) जैसा होता है। इसकी लंबाई लगभग 7 से 8 सेमी, चौड़ाई 5 सेमी और मोटाई 2.5 से 3 सेमी के करीब होती है। हालांकि, uterus का normal size हर महिला में थोड़ा अलग हो सकता है और कई factors पर निर्भर करता है जैसे उम्र, हार्मोनल बदलाव या गर्भधारण का इतिहास।
Uterus का महत्व महिलाओं के स्वास्थ्य में

गर्भाशय महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाता है, जैसे hormones balance रखने में, period regulate करने में, गर्भधारण में, आदि। आइये समझते हैं कैसे:
1. मासिक धर्म चक्र का नियमन (Menstrual Cycle)
हर महीने, गर्भाशय की भीतरी परत (endometrium) तैयार होती है। अगर गर्भधारण नहीं होता, तो यह परत टूटकर बाहर निकलती है, जिसे हम मासिक धर्म (periods) कहते हैं। एक स्वस्थ गर्भाशय नियमित और स्वस्थ मासिक धर्म चक्र सुनिश्चित करता है।
2. हार्मोनल संतुलन (Hormonal Balance)
गर्भाशय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन के प्रति संवेदनशील है। यह हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
3. गर्भधारण और प्रसव (Conception)
गर्भाशय भ्रूण को पोषण देता है, और प्रसव के समय शक्तिशाली संकुचन करके शिशु को बाहर लाने में मदद करता है।
4. संरचनात्मक सहारा ( Structural Support)
यह मूत्राशय और आंतों को उनके स्थान पर बनाए रखने में सहायता करता है।
Uterine Meaning in Hindi – Uterine का क्या मतलब है?
जब डॉक्टर ‘Uterine’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं, तो इसका सीधा संबंध गर्भाशय से जुड़ी चीजों से होता है। उदाहरण के लिए, यदि रिपोर्ट में ‘Uterine Fibroids‘ लिखा है, तो इसका मतलब है गर्भाशय में गांठें। इस शब्द का प्रयोग गर्भाशय की बीमारियों या उसकी संरचना को दर्शाने के लिए किया जाता है।
गर्भाशय के आकार में परिवर्तन के कारण (Causes of Uterus Size Changes)
कई बार गर्भाशय का आकार सामान्य से छोटा या बड़ा हो सकता है और किन्हीं महिलाओं में uterine infection, menopause, fibroids जैसे कई कारणों की वजह से यह पाया जाता है, लेकिन यह ही नहीं इसके और भी कारण है, आइये विस्तार से समझते हैं:
- Fibroids: ये गर्भाशय की दीवारों पर होने वाली गैर-कैंसरयुक्त गांठें हैं, जो uterus का size बढ़ा सकती हैं।
- Adenomyosis: जब गर्भाशय की परत की कोशिकाएं उसकी मांसपेशियों में बढ़ने लगती हैं तब गर्भाशय के आकर में अंतर आ सकता है।
- Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान uterus का आकार बढ़ जाता है और कई बार delivery के बाद आकार सामान्य नहीं हो पाता।
- Uterine Infections: गर्भाशय में infection के कारण भी सूजन आ सकती है, और uterus के आकार में परिवर्तन ला सकती है।
- Menopause: रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोन में कमी के कारण गर्भाशय सिकुड़ सकता है।
- By Birth Issues (जन्मजात विकार): कुछ महिलाएं छोटे गर्भाशय के साथ पैदा होती हैं।
Uterus की बीमारियाँ और उनके लक्षण

गर्भाशय कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हो सकता है, जैसे periods के दौरान दर्द होना, पेट के निचले हिस्से में भारीपन, संबंध बनाने के दौरान दर्द महसूस होना आदि।
आइये जानते हैं कुछ गर्भाशय से जुडी बीमारियाँ और उनके लक्षण:
1. Uterine Fibroids (गर्भाशय फाइब्रॉइड्स): बच्चेदानी की रसौली (Uterine Fibroids) गर्भाशय की मांसपेशियों में होने वाली बिना कैंसर वाली गांठें हैं। ये अक्सर हार्मोनल बदलाव के कारण होती हैं।
लक्षण:
- भारी और लंबे समय तक मासिक धर्म
- पेल्विक क्षेत्र में दबाव या दर्द
- बार-बार पेशाब आना
- पीठ के निचले हिस्से में दर्द
- गर्भधारण में कठिनाई
2. Endometriosis (एंडोमेट्रियोसिस): एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय के अंदर की परत (Endometrium) के समान ऊतक गर्भाशय के बाहर अन्य अंगों, जैसे अंडाशय या फैलोपियन ट्यूब पर बढ़ने लगते हैं।
लक्षण:
- मासिक धर्म के दौरान तेज दर्द
- संभोग के दौरान या बाद में दर्द
- पेशाब या मल त्याग के दौरान दर्द
- अत्यधिक रक्तस्राव
- बांझपन
3. Uterine Polyps (गर्भाशय पॉलीप्स): गर्भाशय पॉलीप्स (Uterine Polyps) गर्भाशय की आंतरिक परत (एंडोमेट्रियम) में कोशिकाओं की अत्यधिक वृद्धि के कारण बनने वाले छोटे, नरम और आमतौर पर गैर-कैंसरयुक्त उभार होते हैं।
लक्षण:
- अनियमित मासिक धर्म
- पेशाब करते समय जलन
- रजोनिवृत्ति के बाद bleeding
- बांझपन
4. Uterine Cancer (गर्भाशय कैंसर): गर्भाशय कैंसर तब होता है जब गर्भाशय की आंतरिक परत (एंडोमेट्रियम) में कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं।
लक्षण:
- असामान्य योनि रक्तस्राव (विशेष रूप से रजोनिवृत्ति के बाद)
- पेल्विक क्षेत्र में दर्द
- पेशाब करने में कठिनाई
- संभोग के दौरान दर्द
गर्भाशय की देखभाल और स्वस्थ बनाए रखने के उपाय
एक स्वस्थ गर्भाशय महिलाओं की reproductive health के लिए जरूरी है। आइये जानें कुछ आसान उपाय जिनसे महिलाएं अपने गर्भाशय को स्वस्थ रख सकती हैं:
- संतुलित आहार लेना
- नियमित व्यायाम करना
- तनाव से बचना
- रेगुलर चेकअप करवाते रहना
- धुम्रपान और शराब से बचे रहना
निष्कर्ष
उम्मीद है कि इस ब्लॉग के माध्यम से आप समझ गए होंगे कि गर्भाशय (uterus in hindi) महिलाओं के जीवन में कितनी बड़ी भूमिका निभाता है।
Yaami IVF & Fertility Centre की specialist Dr Swati Singh के अनुसार अगर किसी भी महिला को periods में समस्या है, पेट दर्द है, या conceive करने में परेशानी आ रही है तो ज्यादा सोचकर समय खराब नहीं करना चाहिए। कई बार जिसे महिलाएं छोटी समस्या समझकर नज़रंदाज़ कर देती हैं वह आगे चलकर शरीर में बड़ी प्रॉब्लम खड़ी कर सकती हैं।
अगर आपको या आपके किसी अपने को uterine problem महसूस हो रही है या लंबे समय से माँ बनने की कोशिश कर रही हैं तो सही guidance और expert care से आपकी समस्या का समाधान संभव है। यही expert care आपको मिलेगी Yaami IVF & Fertility Centre, Indore में, जहाँ हमारे fertility specialists महिलाओं में होने वाली uterus से जुड़ी हर समस्या को समझकर समाधान करते हैं और pregnancy की journey में हर कदम पर साथ देते हैं।
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FAQ: Uterus in Hindi
1. Uterus की सामान्य आकार क्या होती है?
Uterus की लंबाई लगभग 7 से 8 सेमी, चौड़ाई 5 सेमी और मोटाई 2.5 से 3 सेमी के करीब होती है, जो एक नाशपाती के समान दिखता है।
2. क्या uterine fibroids की वजह से गर्भधारण में समस्या हो सकती है?
हाँ, गर्भाशय में फाइब्रॉएड (गांठें) होने से भ्रूण को चिपकने में दिक्कत हो सकती है, जिससे कंसीव करने में समस्या आती है।
3. गर्भाशय का आकार क्यों बढ़ता है?
फाइब्रॉएड, एडेनोमायोसिस, या हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भाशय में सूजन आ सकती है और इसका आकार बढ़ सकता है।
4. Uterine disorders के लक्षण क्या होते हैं?
अनियमित पीरियड्स, अत्यधिक दर्द, कमर के निचले हिस्से में दर्द और बार-बार पेशाब आना इसके मुख्य लक्षण हो सकते हैं।
5. गर्भाशय का स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
हेल्दी डाइट लें, हाइड्रेटेड रहें, नियमित जांच कराएं और किसी भी असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह लें।

Dr. Swati Singh (MBBS, MD – Obstetrics & Gynecology, DNB, FRM, Diploma in Reproductive Medicine and Embryology – Germany) is a leading Infertility Specialist and Gynecologist with over 18 years of experience. As Co-Founder and Senior Consultant at Yaami Fertility & IVF Center, Indore, she offers advanced fertility care including IUI, IVF, ICSI, and management of female reproductive disorders. Known for her compassionate and patient-first approach, Dr. Swati combines global training with deep clinical expertise. She is also actively involved in women’s health advocacy, medical research, and promoting awareness about reproductive wellness and fertility treatments.






