Prolactin Test in Hindi: क्या है और कब कराना चाहिए?

Prolactin Test in Hindi

एक नन्हे बच्चे की आहट सुनने की चाहत में जब आप हर महीने calendar की तारीखें गिनते हैं, तो वह इंतजार धीरे-धीरे एक अनकहे दर्द में बदलने लगता है। हो सकता है कि आप और आपके partner ने शायद हर वह कोशिश की हो जो संभव थी फिर भी, जब pregnancy की report उम्मीद के मुताबिक नहीं आती, तो मन में एक ही सवाल उठता है, आखिर कमी कहाँ रह रही है?

हो सकता है इस कमी का कारण आपके शरीर में prolactin hormone imbalance हो। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) की एक research के अनुसार, prolactin hormone का असामान्य स्तर (Hyperprolactinemia) प्रजनन क्षमता को सीधे प्रभावित करता है। 

Prolactin test kya hota hai – यह hormone न केवल दूध के उत्पादन को नियंत्रित करता है, बल्कि यह शरीर में विभिन्न कार्यों में भूमिका निभाता है, जिसमें immune system और metabolism भी शामिल हैं। विशेष रूप से, बढ़ा हुआ prolactin ‘गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन’ (GnRH) को रोकता है, जिससे अंडे बनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

Yaami IVF and Fertility Centre की विशेषज्ञ Dr. Swati Singh (Reproductive Medicine & IVF Specialist) MBBS, MD, DNB, FRM, DRM (Germany) का मानना है अगर इसका स्तर सामान्य से ज्यादा बढ़ जाए, तो यह periods को अनियमित कर सकता है, और गर्भधारण में भी रुकावट बन सकता है। परन्तु एक साधारण से test से आप अपने शरीर में prolactin का पता लगाकर उसे नियंत्रित कर सकती हैं।

अगर आप भी जानना चाहती हैं कि prolactin test kya hota hai (prolactin test in hindi), प्रोलैक्टिन हार्मोन क्यों बढ़ता है, prolactin kitna hona chahiye या prolactin badhne se kya hota hai तो ये blog आपके सारे सवालों का जवाब है।

प्रोलैक्टिन हार्मोन क्या है? (Prolactin Hormone Kya Hai)

प्रोलैक्टिन क्या होता है, इसे समझना बहुत आसान है। यह एक ऐसा hormone है जो हमारे दिमाग के निचले हिस्से में स्थित ‘पिट्यूटरी ग्लैंड’ (Pituitary Gland) द्वारा बनाया जाता है। इसे अक्सर “मदरिंग हार्मोन” या milk hormone भी कहा जाता है।

इसका मुख्य काम महिलाओं के शरीर में स्तनों के विकास और प्रसव के बाद दूध के उत्पादन को बढ़ावा देना है। लेकिन, यह hormone सिर्फ स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए ही नहीं है, पुरुषों के शरीर में भी यह hormone मौजूद होता है, लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम होती है। Prolactin hormone सीधे तौर पर आपके प्रजनन तंत्र (Reproductive System) को नियंत्रित करता है।

प्रोलैक्टिन टेस्ट क्यों जरूरी है?

यदि आप गर्भधारण में समस्याओं का सामना कर रही हैं या अनियमित मासिक धर्म की शिकायत है तो आपको prolactin test अवश्य करवाना चाहिए। चूँकि ये हॉर्मोन पुरुषों में भी कई समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे यौन इच्छा में कमी होना या स्तंभन दोष (erectile dysfunction) होना इसलिए पुरुषों को भी prolactin test अवश्य कराना चाहिए।

महिलाओं में Prolactin Hormone अन्य fertility hormone जैसे कि estrogen और progesterone के संतुलन को भी बनाए रखता है। जब आपके शरीर में prolactin का स्तर बढ़ जाता है, तो यह दिमाग को यह संकेत देता है कि शरीर अभी गर्भधारण के लिए तैयार नहीं है और इससे आपके अंडे बनने की प्रक्रिया (Ovulation) रुक सकती है।

इसलिए, 

  • यह टेस्ट उन सभी couples के लिए बहुत जरूरी है जो लंबे समय से गर्भधारण की कोशिश कर रहे हैं।
  • महिलाएं जो पीरियड्स में अनियमितता या पीरियड्स का बंद हो जाना महसूस कर रहीं हैं या बिना किसी कारण के स्तनों से दूध जैसा स्राव (Galactorrhea) देख रही हैं।
  • पुरुष जो यौन इच्छा में कमी का सामना कर रहे हैं।

प्रोलैक्टिन टेस्ट की प्रक्रिया क्या है?

prolactin test kya hota hai

Prolactin test को अगर प्रक्रिया के हिसाब से देखें, तो यह किसी अन्य साधारण खून की जांच जैसा ही है। इसमें कोई बड़ी सर्जरी या जटिलता शामिल नहीं है।

आइये जानते हैं इसकी प्रक्रिया:

टेस्ट की तैयारी (Preparation)

  • समय: यह test आमतौर पर सुबह सोकर उठने के 3 से 4 घंटे बाद किया जाता है, क्योंकि दिन भर में इसके स्तर में बदलाव होता रहता है।
  • फास्टिंग (उपवास): कुछ doctors आपको test से पहले 8 घंटे के उपवास की सलाह देते हैं।
  • तनाव और आराम: Test से पहले शांत रहें और शारीरिक परिश्रम से बचें, क्योंकि तनाव प्रोलैक्टिन के स्तर को बढ़ा सकता है।
  • दवाएं: यदि आप कोई सप्लीमेंट (जैसे विटामिन B6) या दवाएं ले रहे हैं, तो doctor को सूचित करें।

प्रक्रिया (Procedure)

  1. सफाई: स्वास्थ्य कर्मी आपकी बांह की नस के पास की त्वचा को antiseptic से साफ करते है।
  2. रक्त का नमूना: एक पतली सुई की मदद से नस से खून का sample लिया जाता है और उसे एक छोटी शीशी (vial) में भरा जाता है।
  3. रिपोर्ट: Sample को लैब में जांच के लिए भेजा जाता है और रिपोर्ट आमतौर पर 1-2 दिनों में मिल जाती है।

यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें केवल 5 मिनट का समय लगता है।

प्रोलैक्टिन टेस्ट के सामान्य स्तर (Normal Levels)

Report मिलने के बाद सबसे पहला सवाल आपके मन में यही होता है कि प्रोलैक्टिन कितना होना चाहिए (prolactin kitna hona chahiye?)

Prolactin के स्तर आपकी वर्तमान स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं जैसे:

  • गैर-गर्भवती महिलाएं: लगभग 2 से 29 ng/mL के बीच।
  • गर्भवती महिलाएं: लगभग 10 से 209 ng/mL (गर्भावस्था के दौरान यह स्वाभाविक रूप से बढ़ता है)।
  • पुरुष: लगभग 2 से 18 ng/mL के बीच।

प्रोलैक्टिन हार्मोन क्यों बढ़ता है

प्रोलैक्टिन हार्मोन क्यों बढ़ता है

प्रोलैक्टिन हार्मोन क्यों बढ़ता है, इसके पीछे कई medical और lifestyle से जुड़े कारण हो सकते हैं।

 आइये जानते हैं इसके कुछ सामान्य कारण:

  • तनाव (Stress): मानसिक और शारीरिक तनाव prolactin को तेजी से बढ़ा सकता है।
  • नींद की कमी: रात को ठीक से नींद न आना hormonal imbalance पैदा करता है।
  • थायराइड की समस्या: यदि आपकी थायराइड ग्रंथि (Hypothyroidism) सुस्त है, तो यह prolactin को बढ़ा सकती है।
  • पिट्यूटरी ट्यूमर: दिमाग की ग्रंथि में एक छोटी सी सौम्य गांठ (Prolactinoma), जो की कैंसर की गाँठ नहीं होती लेकिन prolactin hormone बढ़ा देती है।
  • दवाएं: Depression, high BP या गैस की कुछ दवाओं के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • किडनी या लीवर रोग (Kidney/Liver Disease): ये शरीर से hormone निकालने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे prolactin बढ़ सकता है।
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS): PCOS या अन्य hormonal समस्याएँ जो prolactin को बढ़ावा दे सकती है।

प्रोलैक्टिन स्तर बढ़ने के प्रभाव (Prolactin Badhne Se Kya Hota Hai)

अक्सर couples पूछते हैं कि prolactin badhne se kya hota hai? तो इसका जवाब है की हर महिला और पुरुष में prolactin बढ़ने के अलग अलग प्रभाव पढ़ते हैं।

आइये जानते हैं कुछ सामान्य प्रभाव:

  1. ओव्यूलेशन में बाधा: महिलाओं में अंडे न बनने के कारण कंसीव करने में समस्या आ सकती है।
  2. अनियमित पीरियड्स: Periods का समय पर न आना या बहुत कम आना भी एक समस्या हो सकती है।
  3. कामेच्छा में कमी: पुरुषों और महिलाओं दोनों में यौन इच्छा कम होना।
  4. हड्डियों की कमजोरी: अगर लंबे समय तक prolactin बढ़ा हुआ है तो हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
  5. पुरुषों में समस्या: यह पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (erectile dysfunction) या स्पर्म काउंट (sperm count) की कमी का कारण बन सकता है।

प्रोलैक्टिन टेस्ट के परिणाम का मतलब क्या है?

आपकी report का परिणाम आपके आगे के सफर की दिशा तय करता है। अगर परिणाम सामान्य से अधिक है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप कभी माता-पिता नहीं बन सकते। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि हमें उस ‘रुकावट’ का पता चल गया है जिसे अब दवाओं या lifestyle में बदलाव से ठीक किया जा सकता है। एक सही diagnosis ही सफल इलाज की पहली सीढ़ी होती है।

निष्कर्ष

इस ब्लॉग के माध्यम से आपने प्रोलेक्टिन टेस्ट (Prolactin Test in Hindi) के बारे में जाना और ये भी जाना कि ये आपकी fertility के सफर का एक छोटा सा पड़ाव है, मंजिल नहीं। यह test आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि आपकी मदद करने के लिए किया जाता है ताकि आप जान सकें कि आपकी गर्भधारण की journey को कहाँ सहयोग की जरूरत है।

 यदि आप भी गर्भधारण में किसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो घबराएं नहीं Yaami IVF and Fertility Centre, Indore में हमारे experienced fertility specialists आपकी हर समस्या को ध्यान से सुनते हैं और आपकी parenthood journey में हर कदम पर साथ देते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप +91 78800 07281 पर हमारे expert से consult कर सकते हैं।

FAQS: Prolactin Test in Hindi

प्रोलैक्टिन टेस्ट कब कराना चाहिए? 

यदि आपके पीरियड्स अनियमित हैं, गर्भधारण में दिक्कत आ रही है, या आपको अक्सर सिरदर्द रहता है, तो आपको यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

टेस्ट के लिए क्या तैयारी करनी होती है? 

टेस्ट से एक रात पहले भरपूर नींद लें। सुबह उठने के कम से कम 2-3 घंटे बाद ही ब्लड सैंपल दें। टेस्ट से पहले भारी व्यायाम या शारीरिक संबंध बनाने से बचें, क्योंकि ये चीजें प्रोलैक्टिन को अस्थायी रूप से बढ़ा सकती हैं।

क्या प्रोलैक्टिन का स्तर दिनभर बदलता रहता है?

जी हाँ, प्रोलैक्टिन का स्तर नींद के दौरान सबसे अधिक होता है और सुबह धीरे-धीरे कम होता है। इसलिए समय का ध्यान रखना रिपोर्ट की सटीकता के लिए जरूरी है।

प्रोलैक्टिन टेस्ट कितनी बार कराया जा सकता है? 

अगर पहली रिपोर्ट में स्तर बढ़ा हुआ आता है, तो डॉक्टर अक्सर इसकी पुष्टि के लिए 15-20 दिन बाद दोबारा टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

परिणाम आने में कितना समय लगता है? 

आमतौर पर प्रोलैक्टिन टेस्ट की रिपोर्ट 24 से 48 घंटों के भीतर मिल जाती है।

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