PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) एक हार्मोनल समस्या है जिसमें अंडाशय पर छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। इससे पीरियड्स अनियमित होते हैं, वजन बढ़ सकता है, मुंहासे व बाल झड़ने जैसी समस्याएं होती हैं। यह ओव्यूलेशन और प्रेगनेंसी को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सही इलाज और जीवनशैली से नियंत्रित किया जा सकता है।
पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम(PCOS) महिलाओं में होने वाली एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में सही जानकारी बहुत कम और भ्रांतियां बहुत ज्यादा है | भारत में हर 5 में से 1 महिला को PCOS की समस्या होती है | अक्सर महिलाऐं जानना चाहती है की pcos kya hota h और उन्हें पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम है तो क्या वे माँ बन पाएंगी |
एक सवाल यह भी महत्वपूर्ण है की PCOS और PCOD में क्या अंतर है | आज के इस लेख में हम PCOS से जुड़े सभी सवालों के जवाब जानेंगें |
PCOS Kya Hota Hai (पीसीओएस क्या होता है?)
PCOS का पूरा नाम है – Polycystic Ovary Syndrome (पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम)। यह महिलाओं में होने वाली एक हार्मोनल समस्या है जिसमें अंडाशय पर छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। महिलाओं में मुख्यतः दो हार्मोन बनते हैं – Estrogen और Progesterone।इसके अलावा, महिलाएं थोड़ी मात्रा में Testosterone (Androgen – मेल हार्मोन) भी बनाती हैं। जब शरीर में Androgen की मात्रा अधिक बनने लगती है, तो Estrogen और Progesterone का असर कम हो जाता है।इस असंतुलन के कारण ओवरी से एग रिलीज नहीं हो पाते। नतीजतन, अंडाशय में अपरिपक्व अंडे सिस्ट (गांठ) के रूप में जमा होने लगते हैं। यही स्थिति PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम) कहलाती है।
PCOS और PCOD में क्या फर्क है?

पीसीओडी अंडाशय से संबंधित एक स्थिति है, जबकि पीसीओएस पूरे शरीर को प्रभावित करने वाला सिंड्रोम है। पीसीओडी को नजरअंदाज करने पर यह पीसीओएस में बदल सकता है।
पीसीओडी एक ऐसी स्थिति है जब अंडाशय अपरिपक्व अंडे छोड़ते हैं, जिससे छोटी-छोटी सिस्ट बन जाती हैं। यह कम गंभीर होती है और अक्सर आहार और जीवनशैली में बदलाव से ही इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें ओव्यूलेशन बाधित होता है, लेकिन रुकता नहीं है, इसलिए गर्भावस्था संभव है।
पीसीओएस एक अधिक गंभीर हार्मोनल विकार है जो पूरे शरीर को प्रभावित करता है – केवल अंडाशय को नहीं। इसमें एंड्रोजन का स्तर तेजी से बढ़ता है, ओव्यूलेशन पूरी तरह से बंद हो सकता है, और इससे मधुमेह, हृदय रोग और अन्य दीर्घकालिक जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए निरंतर चिकित्सा प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
PCOS के लक्षण (PCOS Symptoms in Hindi)

PCOS होने पर शरीर में कुछ हार्मोनल परिवर्तन दिखने लगते है, आइये जानते है PCOS के लक्षणों के बारे में –
1. पीरियड की अनियमितता या बहुत कम पीरियड आना –
पीरियड की अनियमितता या बहुत कम पीरियड आना PCOS का एक प्रमुख लक्षण है| यदि महिलाओं को 2 से 3 महीने में पीरियड्स आ रहे हो या फिर बिलकुल भी नहीं आ रहे, इसके अलावा माहवारी के समय बहुत ही कम रक्तस्त्राव हो रहा है तो उन्हें POCS की समस्या हो सकती है
2. चेहरे पर मुंहासों का होना
जब महिलाओं के शरीर में हार्मोनल imbalance होने लगता है तो PCOS की समस्या होती है जिसकी वजह से चेहरे पर मुँहासे होने लगते है | मेडिकल की भाषा में इन्हें हार्मोनल या सिस्टिक एक्ने कहा जाता है |
3. शरीर और चेहरे पर अधिक बाल उगना
महिलाओं के शरीर में जब मेल हार्मोन एण्ड्रोजन बढ़ने लगता है जिसकी वजह से शरीर पर और चेहरे पर बालों की असामान्य वृद्धि होने लगती है |
4. गर्भधारण में कठिनाई
बहुत सी महिलाओं को को PCOS के बारे में तब पता चलता है जब वह गर्भधारण के लिए प्रयास करती है लेकिन बहुत प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती है तो वह कुछ टेस्ट और मेडिकल जांच करवाती है जिसमें उनके PCOS की समस्या पता चलती है | ओवुलेशन साइकिल ठीक से न होने के कारण प्रेग्नेंट होने में प्रॉब्लम होती है|
5. वजन बढ़ना
पीसीओएस के कारण महिलाओं का वजन बढ़ जाता है| यदि आपले वजन अचानक से बढ़ रहा है तो वह भी विशेष रूप से पेट के आसपास तो आप पीसीओएस का लक्षण हो सकते हैं
6. थकान और मूड स्विंग
PCOS के एक और खास लक्षण हैं थकान और मूड स्विंग। अगर आप हमेशा थका हुआ महसूस करती हैं, चिड़चिड़ापन रहता है तो ये भी PCOS की तरफ संकेत कर सकता है।
पीसीओएस के कारण (PCOS Causes in Hindi)
महिलाऐं और लड़कियों का एक सवाल यह भी रहता है की आखिर PCOS होता क्यों है और PCOS होने के कारण क्या होते है |

अनुवांशिक कारण (Genetics) – आनुवंशिकता PCOS होने का यह सबसे प्रमुख कारण है | यदि आपके परिवार में यानि की आपकी मम्मी, बहन, दादी, नानी या और किसी ब्लड रिलेशन में किसी को PCOS की समस्या है तो आपको भी PCOS होने की सम्भावना बढ़ जाती है |
तनाव – खास तौर पर आजकल शहरों में भागदौड़ की जिंदगी, घर परिवार और ऑफिस के दबाव में अक्सर महिलाऐं Personal Life पर ध्यान नहीं दे पाती है | इसके अलावा काम का स्ट्रेस ले लेती है जो की शरीर में हार्मोनल चेंज का कारण बन सकता है |
खराब खानपान – परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी को पूरा करने के चक्कर में महिलाऐं कई बार अपना ब्रेकफास्ट या लंच छोड़ देती है | भोजन पर ध्यान नहीं देती है, कभी खाया कभी नहीं खाया, कभी बाजार से unhealthy खाना खा लिया | यह सब खानपान की बिगड़ती आदतें भी PCOS का कारण बनती है|
एक्ससरसाइज नहीं करने के कारण – अक्सर महिलाऐं कहती है, मुझे एक्ससरसाइज की क्या जरुरत मैं तो घर का पूरा काम करती हूँ | या मैं 2 किलोमीटर पैदल चलती हूं | लेकिन यह पर्याप्त नहीं है स्वयं को स्वस्थ और PCOS जैसी बीमारी से बचने या उससे recover करने के लिए महिलाओं को दिन में कम से कम 30 से 40 मिनिट एरोबिक एक्ससरसाइज करनी चाहिए | जिसमें उनका पसीना निकले और हार्टबीट कम से कम 120 तक पहुंचे|
इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance): पीसीओएस का एक सबसे बड़ा कारण है इंसुलिन प्रतिरोध। जब शरीर में इंसुलिन हार्मोन ठीक से काम नहीं करता तो इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण ओवरी में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है जो ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है।
PCOS का पता कैसे लगाए(PCOS Diagnosis)
यदि कोई 2 लक्षण एक समय पर आपके शरीर में दिखाई दे रहे है तो आपको PCOS हो सकता है |
- सोनोग्राफी: यदि महिला के अंडाशय में बहुत सारे सिस्ट यानि की अपरिपक्व अंडे है जिन्हें की String of Pearl appearance कहा जाता है|
- Periods: Patient को यदि लम्बे समय से नहीं आ रहे है या 2,3 महीने के बाद पीरियड्स आ रहे है या पीरियड्स आ भी रहे है तो वो बहुत ही कम मात्रा में आ रहे है तो यह PCOS का एक लक्षण है |
- हार्मोनल imbalance: यदि कुछ हार्मोनल imbalance के लक्षण दिखाई दे रहे है जैसे चेहरे पर मुँहासे होना या चेहरे पर दाढ़ी के जैसे बालों का उगना |
- ब्लड टेस्ट: आपके शरीर में Male hormones की मात्रा अधिक है तो यह एक लक्षण है PCOS का |
- Blood Sugar Test: Diabetes या insulin resistance पता करने के लिए
Tests for PCOS
- PCOS के लिए डॉक्टर्स Hormonal Imbalance चेक करने के लिए ब्लड टेस्ट की सलाह देते है जिससे यह पता चल पाता है की शरीर में male hormone का प्रभाव ज्यादा है या नहीं |
- इसके अलावा अल्ट्रासॉउन्ड के द्वारा ओवेरी की जांच की जाती है जिससे यह जांचा जाता है की ओवेरी में सिस्ट की स्थिति क्या है | इससे PCOS की गंभीरता का पता चलता है |
- इंसुलिन रेजिस्टेंस चेक करने के लिए डॉक्टर आपको ब्लड शुगर टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं
पीसीओएस का उपचार (PCOS Treatment in Hindi)
पीसीओएस का कोई परमानेंट इलाज नहीं है, पर सही लाइफस्टाइल से इसे लंबे समय तक मैनेज किया जा सकता है। PCOS का इलाज(pcos treatment in hindi) इस बात पर निर्भर करता है की महिला या लड़की की उम्र क्या है उनमें क्या क्या लक्षण दिखाई दे रहे है | जैसे की कई लड़कियां केवल यह जानने के लिए उनके एक्ने की समस्या अधिक है और एक्ने निशान छोड़ रहे है तो उनके लिए डॉक्टर्स कुछ दवाई बताते है जो की ओरल रूप से दी जाती है |
लेकिन केवल दवाइयां लेने से ही यह समस्या हल नहीं हो जाएगी | इसके लिए अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाना जरुरी है |
लाइफस्टाइल में बदलाव:
- खाने में पौष्टिक आहार लेना|
- ज्यादा तला भुना और शुगर युक्त, कोल्डड्रिंक आदि से बचना होगा |
- रोजाना व्यायाम करना और वजन घटाना सबसे महत्वपूर्ण है |
दवाइयाँ:
- यदि PCOS के कारण गर्भधारण में कठिनाई हो रही है तो डॉक्टर्स आपको ओव्यूलेशन के लिए दवाइयां दे सकते है |
- यह दवाइयाँ ओरल रूप से आप ले सकते है |
- कुछ मामलों में डॉक्टर्स मरीज को इंजेक्शन की भी सलाह दे सकते है |
आहार (Diet)
- लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला खाना खाएं जैसे साबुत अनाज, दालें, हरी सब्जियां।
- कोशिश करें कि चीनी और प्रोसेस्ड फूड से दूर रहें।
रेगुलर जांच (Checkup)
- हर 4-6 महीने में डॉक्टर से मिलें और अपना चेक ज़रूर करवाएं।
- अपना ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर की रेगुलर जांच कराएं।
PCOS में क्या खाएं, क्या न खाएं?

क्या खाएं:
- दालें और फलियाँ
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ
- ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस
- अलसी के बीज, अखरोट
- दही और छाछ
- हल्दी और दालचीनी वाली चाय
क्या न खाएं
- मैदा और white bread
- मीठे पेय पदार्थ
- Processed और junk food
- अत्यधिक dairy products
- तला-भुना खाना
PCOS और गर्भावस्था : मातृत्व की संभावना
यदि महिला को PCOS है तो गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है लेकिन ऐसा नहीं है की वह कभी माँ नहीं बन सकती |
सही ईलाज से वह गर्भधारण कर सकती है और मातृत्व का सुख पा सकती है |
- किसी फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट या गाइनेकोलॉजिस्ट से सलाह लें
- हार्मोन लेवल, अल्ट्रासाउंड और दूसरे टेस्ट करवाएं।
- अपने ओवुलेशन साइकिल को ट्रैक स्टार्ट करें।
- प्रेग्नेंसी से पहले 3–6 महीने हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं।
- वज़न सामान्य रखें और अगर वज़न ज़्यादा है तो वज़न घटाएं। वज़न घटाने से भी ओवुलेशन साइकिल ठीक हो सकती है।
- अगर ओवुलेशन टाइम से नहीं हो रहा है तो डॉक्टर आपको दवाइयाँ देकर भी ओवुलेशन ट्रिगर करवा सकते हैं।
- अगर दवाइयों से फ़ायदा न हो रहा हो तो आप इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन (IUI) या इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) विकल्प भी अपना सकते हैं।
- PCOS में जेस्टेशनल डायबिटीज़ का खतरा ज़्यादा होता है। रेगुलर प्रीनेटल चेकअप, कम चीनी वाला खाना और हल्का व्यायाम ज़रूरी है।
डॉक्टर से कब मिलना ज़रूरी है?
ज़्यादातर महिलाएँ PCOS के लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देती हैं, लेकिन अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से 2 या उससे ज़्यादा लक्षण दिखाई दें, तो आपको निश्चित रूप से अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ(gynecologist) से मिलना चाहिए।
- 3 महीने से ज़्यादा पीरियड्स नहीं आना
- अचानक बहुत ज़्यादा बालों का झड़ना
- चेहरे और शरीर पर ज़्यादा बाल आ रहे हों
- 1 साल से ज़्यादा ट्राई करने के बाद भी प्रेग्नेंसी न हो
- बहुत ज़्यादा पेट दर्द या पेल्विक पेन हो
- अचानक तेज़ी से वज़न बढ़ रहा हो
- एक्ने का इलाज के बाद भी ठीक न होना
Conclusion
PCOS की समस्या के उपचार के लिए सबसे जरुरी है डॉक्टर का सही परामर्श | इसके लिए यामी IVF & फर्टिलिटी सेंटर सबसे अच्छा विकल्प है | क्योंकि यहाँ पर अत्याधुनिक मशीनों के साथ ही आपके सभी मेडिकल परिक्षण किये जाते है और आपकी समस्या को देखने के बाद आपको उसके अनुसार ईलाज दिया जाता है |
यदि PCOS के कारण गर्भधारण में आपको समस्या आ रही है तो इसके लिए आपको दवाइयों या इंजेक्शन के द्वारा ओव्यूलेशन को आसान बना सकते है | यदि समस्या गंभीर है तो आपको डॉक्टर्स परिक्षण के बाद IUI या IVF की सलाह दे सकते है | सभी जगह से निराश हो चुकी महिलाऐं यहाँ पर डॉक्टर्स की मदद से सही ईलाज पा सकी है और आज खुशहाल जिंदगी जी रही है |
FAQ:
PCOS के लक्षण क्या है ?
शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होना, पीरियड्स का बहुत समय बाद आना या ना आना, माहवारी के दौरान रक्तस्त्राव बहुत कम होना, चेहरे पर मुँहासे होना, चेहरे पर बालों का आना, गर्भधारण में कठिनाई होना |
क्या PCOS वाली महिलाऐं माँ नहीं बन सकती ?
PCOS के कारण गर्भधारण में महिलाओं को कठिनाई आ सकती है लेकिन ऐसा नहीं है की वे माँ नहीं बन सकती | डॉक्टर्स से परामर्श लेकर सही ईलाज से महिलाऐं माँ बन सकती है |
PCOS की समस्या किस उम्र की महिलाओं को अधिक होती है ?
टीनएज से लेकर 35 वर्ष की महिलाओं को PCOS की समस्या अधिक हो सकती है |
PCOS की जांच कैसे करें ?
PCOS की जांच के लिए आप ब्लड टेस्ट करवा सकते है जिससे आपके हार्मोनल इम्बैलेंस का पता चल जाता है इसके अलावा पेल्विक अल्ट्रासॉउन्ड के द्वारा आपकी ओवेरी में सिस्ट है या नहीं इसका पता लगाया जा सकता है|
PCOS सिर्फ मोटी महिलाओं को होता है
पतली महिलाओं को भी हो सकता है।PCOS किसी भी शरीर की महिला को हो सकती है। लगभग 20% PCOS के मामले सामान्य या कम वजन वाली महिलाओं में पाए जाते हैं।
क्या pregnancy के बाद PCOS ठीक हो जाती है?
जरूरी नहीं। Pregnancy से PCOS ठीक नहीं होती। गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव से लक्षणों में कुछ फर्क आ सकता है, लेकिन समस्या की जड़ बनी रहती है।
क्या तनाव से PCOS बिगड़ती है?
हाँ। लंबे समय तक तनाव cortisol बढ़ाता है, जो हार्मोनल असंतुलन को और गहरा कर देता है। इसीलिए stress management को PCOS की देखभाल का एक अहम हिस्सा माना जाता है।

Dr. Sankalp Singh (MBBS, MS – Obstetrics & Gynecology, FIRM, FRM – Germany) is a highly respected Reproductive Medicine and IVF specialist with over 20 years of clinical experience. He is the founder and chief consultant at Yaami Fertility & IVF Center, Indore, where he provides advanced fertility solutions including IUI, IVF, ICSI, and fertility preservation. Trained internationally, Dr. Singh combines global expertise with a compassionate approach to guide couples on their journey to parenthood. He is also deeply committed to academic teaching, clinical research, and spreading awareness about reproductive health and fertility treatments.








